AjayShrivastavasBlogs
Friday, 23 February 2018
एतरफा प्रेम का अंत
बेहद सामान्य से दिखने वाले पर जुबली हिट देने वाले राजेंद्र कुमार सिनेमा के जगमगाते सितारे थे। उनका आकर्षण और स्टाइल उस समय के लोगों में लोकप्रिय था। उनके ऊपर फिल्माए गए रोमांटिक गीतों से यदाकदा आज भी लड़के लड़कियों तक अपनी बात पहुंचा देते हैं। खासकर जिनकी मुहब्बत प्रिया नाम की लड़की से हो।
कौन है जो सपनों में आया, कौन है जो दिल में समाया। लो झुक गया आस्मां भी, इश्क मेरा रंग लाया। ओ प्रिया.....
खैर, उनकी दीवानगी आम लोगों में तो थी ही साथ ही ये दीवानगी उनके उम्र में काफी छोटी सायरा बानों में भी थी। बात थी झुक गया आस्मां फिल्म के समय की। राजेंद्र कुमार एक पेशेवर कलाकार थे। वो अभिनय करते थे पर अभिनेत्री सायरा बानो उनके प्रति आकर्षित होती चली गईं। बात तब और उलझ गई जब सायरा ने राजेंद्र को अपने भावी जीवनसाथी केे रूप में चुनने का फैसला कर लिया। राजेंद्र कुमार फिल्म में भले ही उनके नायक थे पर असल जिंदगी में वो उनके वरिष्ठ कलाकार थे। इसके साथ ही वो शादीशुदा थे और कुमार गौरव के पिता भी थे।
सारी बात भांपकर राजेंद्र कुमार ने एक दिन सायरा को कमरे में बुलाया और दरवाजा बंद कर दिनभर उनको समझाने की कोशिश की कि उनकी दीवानगी का उनके दांपत्य जीवन पर बुरा असर पड़ सकता है। पर सायरा ने नहीं समझने की ठान ली थी।
वहीं सायरा बानों की दीवानगी ने उनकी मां नसीम बानों को भी परेशानी में डाल दिया। नसीम अपने समय की बेइंतहां खूबसूरत पर सीधी-साधी जीवनशैली वाली अभिनेत्री थीं। नसीम को उस समय के सुपर स्टार दिलीप कुमार बेहद इज्जत देते थे। वो उनके घर आते-जाते थे और उनकी हर परेशानी से पूरी तरह वाकिफ थे। नसीम ने दिलीप कुमार के सामने इजहारे दर्द किया। वो दिलीप कुमार के दांपत्य जीवन से पूरी तरह वाकिफ थीं उन्होंने दिलीप कुमार से कहा कि वो सायरा से निकाह कर लें। दिलीप ने नसीम बानों की खातिर मंजूरी दे दी। इस तरह से कमसिन सायरा अपने से उम्र में कहीं बड़े दिलीप कुमार की हमसफर बनीं।
Sunday, 11 February 2018
रोमांस: अनदेखा सा महत्व
एक बार मैंने अपने मित्र से एक सवाल पूछा- तुम्हें नहीं लगता कि हमारे सिनेमा में जैसे नायक-नायिका का रोमांस दिखाया जाता है। वस्तुत: आम आदमी की जिंदगी में इतना रोमांस होता ही नहीं है या कहें रोमांस होता ही नहीं है। जवानी उत्साह के साथ उठती है, शादी होती है, कुछ दिन तक प्रेम के प्रसंग होते है उसके बाद बच्चे होते हैं, परिवार बन जाता है और विवाह के चार-पांच साल बाद रोमांस सामान्य हो जाता है। वो आकर्षण नहीं होता, वैसी उत्तेजना नहीं रह जाती। तनाव और जिंदगी की भागदौड़ में सबकुछ खो जाता है। मित्र के विचार कुछ खास नहीं थे।
जिंदगी में प्रेम या रोमांस का अनदेखा सा महत्व जरूर है। लोगों ने इसे महत्व नहीं दिया क्योंकि उनका मन कई कारणों को लेकर रोमांस के प्रति ठंडी प्रतिक्रिया में बदल जाता था। उन्हें ऐसा करने में शर्मिंदगी का अहसास भी होता था। उम्र भी बाधा हो जाती थी।
अब आपको यह बात बताना जरूरी है कि रोमांस आपकी जिंदगी में तनाव को दूर करता है। कितनी बार होता है कि जिंदगी से कुछ पल चुराकर पत्नी अपने पति के लिए उसकी पसंद की चीज लाए उसे पसंद की कोई चीज खिलाए, अगर वो उसे खुद आपने हाथों से बनाए तो बात ही क्या है? कितनी बार पति या पत्नी अपने व्यस्त जिंदगी से कुछ पल निकालकर कुछ सरप्राइज दें अपने साथी को?
आपको बता दें कि हमारे शरीर में हार्मोंस का स्राव लगातार होता रहता है। भावनाओं को नियंत्रित करने में और शरीर और मानसिक दशा को पूर्णत: नियंत्रित करने में इनका बहुत योगदान होता है। ये आकर्षण को पैदा करते हैं और प्यार करने की और पाने की इच्छा को तेज करते हैं या रोकते हैं।
रोमांस को बहुधा कामुक शारीरिक क्रियाओं से जोड़कर देखा जाता है। इसका परिणाम सिर्फ और सिर्फ बिस्तर तक सीमित रह जाता है। रोमांस भावनात्मक ज्यादा होता है। यहां तो चुम्बन में भी भावनाएं होती है। बातचीत होती है।
एक परेशानी और भी है जो घातक है- ये परेशानी है साथी की ठंडी प्रतिक्रिया। ये प्रतिक्रिया बहुधा अनैतिक संबंधों को जन्म देती है। तेज हार्मोंस भावनाओं को निकलने के लिए इतना उत्तेजित कर देते हैं कि इंसान गलत रास्ते पर भी चलने को तैयार हो जाता है।
रोमांस रोज नहीं तो कम से कम सप्ताह में एक बार तो होना ही चाहिए इसके लिए आपको समय निकालना होगा। इससे रिश्तों में नई ताजगी तो आती ही है साथ ही तनाव दूर होता है। प्रेम चरम पर पहुंचने पर दिल की धड़कने और सांसे तेज हो जाती है, जिससे रक्त का संचार बेहतर होता है। दिल की बीमारियों से कुछ हद तक बचा भी जा सकता है। एक रिसर्च के अनुसार प्रेम युक्त शारीरिक क्रियाओं को सप्ताह में एक बार करने से दिल की बीमारियों से बचने की संभावना 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। तनाव बाहर आ जाता है। बाकी सब आप स्वयं के अनुभव से समझ सकते हैं।
रोमांस की भावनाओं के कई रंग होते हैं। पति अपने पत्नी को सायकल या गाड़ी पर पीछे बिठाकर यहां-वहां घुमाता है। उसे कुछ ऐसी यादगार देता है जो उसे उसकी याद दिलवाती रहती है। ऐसी कोई रोमांटिक एक्टिविटी हो या हो सबसे पहला किस। रोमांस उत्तेजक भी हा ेसकता है भावनात्मक भी। ये एक खास पहलू है जीवन का जिसे अनदेखा किया जाता है कभी जानकर कभी अनजाने में।
Saturday, 4 November 2017
अनोखी घटना
Wednesday, 27 September 2017
रामायण पर बहुप्रतिक्षित डाक टिकट जारी हुआ
रामायण पर बहुप्रतिक्षित डाक टिकट जारी हुआ दशहरे पर राम भक्तों को डाक विभाग का तोहफा भारत जैसे देश में राम पर अब तक मात्र दूसरा डाक टिकट जारी मर्यादा पुरुषोत्तम राम पर विदेशों में कई टिकट जारी हुए हैं राम कथा पर कई टिकट जारी करने वाला अनोखा देश इंडोनेशियाहाल ही में भारतीय डाक विभाग द्वारा शुक्रवार को वाराणसी के मानस मन्दिर से भगवान राम के जीवन पर आधारित 11 डाक टिकटों का एक सेट जारी किया है । देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी ने इस सेट को जारी किया। मानस मन्दिर से ही टिकट जारी करने का एक विशेष कारण है , क्योंकि यह मानस मन्दिर वही मानस मन्दिर है जहां पर रामायण के हर पहलू को उकेरा गया है । वाराणसी जाने वाला हर यात्री मानस मन्दिर जरूर जाता है । डाक टिकट संग्राहक अोम पाटोदी ने बताया की बहुप्रतीक्षित रामायण पर डाक टिकट जारी होने से टिकट संग्रहको में काफी उत्साह है । इस वर्ष डाक विभाग में कई यादगार डाक टिकट जारी किये है इसी श्रृखला में महाभारत पर भी डाक टिकट जारी करने की घोषणा की जा चुकी है । रामकथा विश्व की सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली कथा है इसके पात्र मर्यादा पुरुषोत्तम राम प्रत्येक जनमानस के के हृदय पटल पर अंकित है । इन टिकटों में रामायण के विभिन्न प्रेरक कथानकों का बखूबी चित्रण किया गया है इसमें राम के स्वयंवर से लेकर वनवास, राम भरत मिलाप ,केवट प्रसंग ,शबरी प्रसंग, सीताहरण, हनुमान जी का सीता से मिलना अशोक वाटिका प्रसंग, रामसेतु निर्माण प्रसंग , राम रावण युद्ध और राजतिलक सभी प्रसंगों को बडी सुन्दरता के साथ प्रस्तुत किया गया है।संग्रहकर्ताओं के लिए संग्रहणीय होकर भारत के जनमानस के लिए भी प्रेरक है । मात्र ग्यारह टिकटों में पूरी रामायण का सार प्रदर्शित करने से यह एक अनूठा डाक टिकट बन गया है । पिछले दो साल से डाक विभाग अलग-अलग विषयों पर नए डाक टिकट जारी कर रहा है जिसकी जरूरत थी। जिस तरह डाक विभाग ने डाक टिकट संग्रहकर्ताओं का ख्याल रखा है और फिलैटली में नए-नए टिकट जारी किए हैं। जिससे लगता है कि भारती डाक विभाग में परिवर्तन का दौर शुरू हो चुका है। पाटोदी में बताया कि भारत में मर्यादा पुरुषोत्तम राम पर अब तक मात्र एक डाक टिकट 1967 में जारी हुआ था जिसमें राम-लक्ष्मण, सीता के अलावा ऋषि वाल्मीकि को दर्शाया गया था. यह टिकट मात्र 15 नए पैसे का था । विदेशी में हिंदू देवी देवताओं की बात करें तो इंडोनेशिया एक ऐसा देश है जहां पर कई हिंदू देवी देवताओं के डाक टिकट जारी हुए हैं , उसमें राम लक्ष्मण सीता हनुमान के अलावा श्री कृष्ण बलराम भीम यहां तक कि रावण पर भी डाक टिकट जारी किए गए हैं वही एशियाई देश *ताओस* मुस्लिम देश *यमन* अरब देश *अजमान* वही *कंबोडिया नेपाल जर्मनी जापान अमेरिका* सहित कई देशों ने भारती जनमानस के आस्था के केंद्र देवी देवताओं तीर्थंकर आदि पर डाक टिकट जारी किए हैं । जिसमें राम , कृष्ण ,हनुमान, गणेश, शिव-पार्वती, ब्रह्मा विष्णु महेश, भगवान महावीर , गौतम बुद्ध जैसे कई देवी-देवताओं के डाक टिकट उपलब्ध है ।
Subscribe to:
Posts (Atom)
एतरफा प्रेम का अंत
बेहद सामान्य से दिखने वाले पर जुबली हिट देने वाले राजेंद्र कुमार सिनेमा के जगमगाते सितारे थे। उनका आकर्षण और स्टाइल उस समय के लोगों में लोकप...
-
बेहद सामान्य से दिखने वाले पर जुबली हिट देने वाले राजेंद्र कुमार सिनेमा के जगमगाते सितारे थे। उनका आकर्षण और स्टाइल उस समय के लोगों में लोकप...
-
ये डाक टिकटों से जुड़ी अनोखी जानकारी है। यहाँ मैं आपको उन तथ्यों से परिचत करवाऊँगा जो कि हमारी महान सांस्कृतिक विरासत को डाक टिकटों से जोड...
-
कभी-कभी हमारे बीच कुछ ऐसी अनोखी घटनाएं हो जाती हैं। जो हमारे लिए अनोखी होती हैं और कुछ ऐसी अनुभूति दे जाती हैं जो आश्चर्य, आस्था, विश्वास ...












